ख़ुदा के दर से तुझे इस अदास माँगा है कि हाथ उठा के नहीं सर झुका के माँगा है
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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तुझ को छू कर और किसी की चाह रखें हैरत है और लानत ऐसे हाथों पर
Varun Anand
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सीने में तो काँटे ही नहीं हैं दिल में फिर ये चुभन क्यूँ है माना कि ख़ुदा है साथ मेरे फिर भी ये अकेलापन क्यूँ है
Adnan Ali SHAGAF
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तेरे बा'द इस क़दर मैं रोया हूँ लोग मुझ को नदी बुलाते हैं
Adnan Ali SHAGAF
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जब कभी ज़ख़्म तेरे भरने लगें याद करना मुझे अकेले में
Adnan Ali SHAGAF
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हक़ीक़त में नहीं हूँ ख़ूबरू उतना मगर तस्वीर में अच्छा लगूँगा मैं
Adnan Ali SHAGAF
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पूछती है सच बताएँ, गर किसी से इश्क़ है सच तो ये है, हाँ मुझे अब हर किसी से इश्क़ है फिर रहा है बेटी के रिश्ते के ख़ातिर क्यूँ वो बाप पूछ लेता काश, ऐ दुख़्तर, किसी से इश्क़ है
Adnan Ali SHAGAF
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