प्यास बुझती नहीं होंठ सूखे पड़े हाल क्या हो गया ग़म के बाज़ार में रात कटती है बिस्तर पे करवट में अब चैन लूटा है तू ने सनम प्यार में
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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न करो बहस हार जाओगी हुस्न इतनी बड़ी दलील नहीं
Jaun Elia
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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ये तुम्हें क्या हुआ है क्या ग़म है तुम बताओ तो आँख क्यूँ नम है एक ही घूँट में शिफ़ा होगी पीके देखो ये आब-ए-ज़मज़म है
Zafar Siddqui
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यूँँ सितम उस ने माँ पे ढाया है माँ के ज़ेवर ही बेच आया है चापलूसी है करता बीवी की और माँ को फ़क़त सताया है
Zafar Siddqui
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ज़ुल्म की इंतिहा बुरी होगी सोच कर बस ये मर गया कोई
Zafar Siddqui
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मुहब्बत ये मुहब्बत वो मुहब्बत सिवाए दर्द-ओ-ग़म के कुछ नहीं है
Zafar Siddqui
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मिल रहा है गले ज़फ़र दुश्मन ईद ऐसी बहार लाई है
Zafar Siddqui
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