क़लम ने कल छुआ था कोरे काग़ज़ को कई दिन शा'इरी महकेगी मुझ सेे अब
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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आज का दिन भी ऐश से गुज़रा सर से पाँव तक बदन सलामत है
Jaun Elia
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रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
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मेरी चाहत किसी आँगन की तुलसी है मैं कैसे घर में लाऊँ माँ कोई तुलसी
100rav
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ये दुनिया थी आज़ाद पंछी बना दी किसी ने घड़ी यार
100rav
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लाश बन जाता है हर इंसान जो गर रूह निकले कहती है वो तुम मुझे क्या दूर करना चाहते हो
100rav
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हाँ मेरी आँख में भी इक समुंदर है नहीं रुकते ये आँसू जब लगे बहने
100rav
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शजर सूखा तो बदला घोंसला चिड़िया ने हर दम पर वहीं चिड़िया अगर जाए शजर फिर सूख जाता है
100rav
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