क़ल्ब का नाम क़ल्ब होता है अक़्ल का नाम जी-हुज़ूरी है
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
Parveen Shakir
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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उस एक शख़्स को हम भूलने की कोशिश में न जाने कितनी दफ़ा उस को याद कर बैठे
Rakesh Mahadiuree
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शे'र मेरा सुन के अहल-ए-बज़्म तो ख़ामोश थी मेरे आगे लिखने वाले तब्सिरा करते रहे
Rakesh Mahadiuree
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पहले सी दिल में हुस्न की चाहत नहीं बची देखा है हम ने हुस्न को इतने क़रीब से
Rakesh Mahadiuree
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ग़ज़ल कहता हूँ और बारूद पे सिगरेट पीता हूँ अगर भूचाल भी आ जाए तो मैं डर नहीं सकता
Rakesh Mahadiuree
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जिस शख़्स को हर वक़्त ही बेहतर की तलब हो चालाक हो सकता है वो प्यारा नहीं होगा
Rakesh Mahadiuree
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