राम-ओ-रहीम के पूजक प्यार क्यूँ न जाने दो मज़हबों की चाहत को इश्क़ क्यूँ न माने
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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प्यार का रिश्ता ऐसा रिश्ता शबनम भी चिंगारी भी या'नी उन सेे रोज़ ही झगड़ा और उन्हीं से यारी भी
Ateeq Allahabadi
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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तुम्हारी यादें हैं सो कैसे इनको भूल जाएँ हम भला कोई हवा के बिन जिया है और जी सकता है
ATUL SINGH
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जानता हूँ कि हवाएँ तुझे बहकाती हैं जा चराग़ों की तरह तू भी उजाला कर दे
ATUL SINGH
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ख़ूब-सूरत साथ बीते वो हमारे पल सभी थे थे मगर गुज़रे हुए बस वो हमारे कल सभी थे
ATUL SINGH
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बिछड़ कर तुम सेे वो दिन ज़िन्दगी में लौट आए हैं तुम्हें अब चाँद में हम देखते हैं और सो जाते हैं
ATUL SINGH
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फिर किसी लड़की से दिल अपना लगा मैं ने लिया है दर्द सहने में मेरे दिल को मज़ा आने लगा है
ATUL SINGH
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