रातों को जागने लगा हूँ अब मेरे घर माहताब आने लगे
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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ज़िंदगी इस तरह कुछ अपनी बसर होती रही चाह फूलों की थी काँटों पर गुज़र होती रही
Tarun Bharadwaj
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ज़िंदगी मेरी सँवर जाती तो अच्छा होता तेरी बाहों में गुज़र जाती तो अच्छा होता तेरा दीदार हो ये लब पे दुआ थी कब से तू भी कुछ देर ठहर जाती तो अच्छा होता
Tarun Bharadwaj
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सुनता नहीं ये दिल मेरी कोई भी बात अब मुझ सेे ख़फ़ा हुए हैं ये दिन-और-रात सब कह दे कि तेरी सोच में मैं इक ख़याल हूँ कह दे तू छोड़ती हूँ मैं भी तेरा साथ अब
Tarun Bharadwaj
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वो तभी पाया गया है पास में जब हमें यूँँ बेख़ुदी होने लगी
Tarun Bharadwaj
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तेरी नज़रों का झुकना जबके बैचेनी बढ़ाता है तेरी नज़रों का तो उठना हमें निपटा ही डालेगा
Tarun Bharadwaj
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