ज़िंदगी इस तरह कुछ अपनी बसर होती रही चाह फूलों की थी काँटों पर गुज़र होती रही
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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सुनता नहीं ये दिल मेरी कोई भी बात अब मुझ सेे ख़फ़ा हुए हैं ये दिन-और-रात सब कह दे कि तेरी सोच में मैं इक ख़याल हूँ कह दे तू छोड़ती हूँ मैं भी तेरा साथ अब
Tarun Bharadwaj
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ज़िंदगी मेरी सँवर जाती तो अच्छा होता तेरी बाहों में गुज़र जाती तो अच्छा होता तेरा दीदार हो ये लब पे दुआ थी कब से तू भी कुछ देर ठहर जाती तो अच्छा होता
Tarun Bharadwaj
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मुझ में नफ़रत न प्यार है अब तो जीत कोई न हार है अब तो
Tarun Bharadwaj
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मुझ को समझ रहा है तू शाइ'र फ़लाँ फ़लाँ अपनी ही बक रहा हूँ जो दुनिया से है मिला
Tarun Bharadwaj
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पढ़े-लिखे बालक तेरी क्या ज़िम्मेदारी है सामने भूखा बच्चा है और माँ दुखियारी है
Tarun Bharadwaj
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