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राह पर सदाक़त की गर चला नहीं होता  सच हमेशा कहने का हौसला नहीं होता कोशिशों से देता है रास्ता समुंदर भी हौसला रहे क़ाएम फिर तो क्या नहीं होता

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मुझ को तिजारतों में ख़सारा नहीं हुआ ये और बात है कि गुज़ारा नहीं हुआ ये सोच कर मैं ख़ुश हूँ कि ग़ुरबत में भी मुझे लालच-दग़ा-फ़रेब गवारा नहीं हुआ

SALIM RAZA REWA

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उन के दर पर सलाम कह देना मैं हूँ उन का ग़ुलाम कह देना उन सेे मिलने की दिल में ख़्वाहिश है मेरा इतना पयाम कह देना

SALIM RAZA REWA

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उन के एल्बम में है तस्वीर पुरानी मेरी         अब वो देखेंगे तो पहचान नहीं पाएँगे

SALIM RAZA REWA

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शादाब जिन की ख़ुशबू से हर इक गुलाब है रौशन चमक से जिन की 'रज़ा' आफ़ताब है सूरत वो जिस पे नाज़ है कुल काएनात को वो सूरत-ए-रसूल ख़ुदा की किताब है

SALIM RAZA REWA

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रोज़ मिलने की तसल्ली न दिया कर मुझ को  जान ले लेगा किसी रोज़ बहाना तेरा

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