रंगतें रंगों ने पाई आपसे आप को रंगों से क्यूँ परहेज़ है जिस सेे चाहे उस सेे होली खेलिए ज़िंदगी हर रंग से लबरेज़ है
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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वो शांत बैठा है कब से मैं शोर क्यूँ न करूँ बस एक बार वो कह दे कि चुप तो चूँ न करूँ
Charagh Sharma
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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ज़िंदगी भी आख़िरश तंहाई है मैं भला तन्हाई से क्यूँ डर गया
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ज़िंदगी से जंग चाहे ज़िंदगी भर ही चले जीते जी तो मेरी जाँ अब हार मानेंगे नहीं मुस्कुरा कर ही सहेंगे चाहे जितना दर्द हो मुस्कुराने से कदाचित् रार ठानेंगे नहीं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वो जो ख़ुद इक गुलाब है यारो आज उस को गुलाब देना है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वो शाख़ों पे गुलाब इक और आया लो माह-ए-फ़रवरी का दौर आया
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जल्दी जल्दी सभी पुराने कामों को पूरा कर लो वक़्त ने बदली हैं तारीखें नया कलंडर आता है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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