जल्दी जल्दी सभी पुराने कामों को पूरा कर लो वक़्त ने बदली हैं तारीखें नया कलंडर आता है
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे
Farhat Abbas Shah
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ज़िंदगी भी आख़िरश तंहाई है मैं भला तन्हाई से क्यूँ डर गया
Ajeetendra Aazi Tamaam
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बस और कुछ नहीं है मिरी जान इश्क़ है वो हर घड़ी जो इत्र सा महकाए आप को
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ये शब का पहर ये सर्द फ़ज़ा जला के अलाव बैठे हैं हम
Ajeetendra Aazi Tamaam
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यूँँ बहाएा न कर सर-ए-महफ़िल अश्क आँखों का आब-ए-ज़मज़म है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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वतन की मिट्टी का मोल क्या है जो बिक चुके हैं उन्हें पता क्या वतन परस्ती का उन सेे पूछो है जिन का अब तक ज़मीर ज़िंदा मिली है गर सर पे सर कटे हैं न काम आई कोई सियासत अतीत में देखो रंग जा कर है ज़ा'फ़रानी स्वतंत्रता का
Ajeetendra Aazi Tamaam
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