रहने लगे उदास तो लिखने लगे थे शे'र सूखे हुए थे पेड़ सो कश्ती बना दिया दिन भर लगा के उस को बनाया था इक मकाँँ साहिल की एक मौज़ ने मिट्टी बना दिया
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मुझ ऐसा शख़्स अगर क़हक़हों से भर जाए ये साँस लेती उदासी तो घुट के मर जाए वो मेरे बा'द तरस जाएगा मोहब्बत को उसे ये कहना अगर हो सके तो मर जाए
Rakib Mukhtar
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं दिल हमेशा उदास रहता है
Bashir Badr
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सुनहरे ख़्वाबों से जिस मकाँ को सजाया था हम ने मिल के बरसों हमारे ख़्वाबों के उस मकाँ को लगा दी है आग ख़ुद ही उस ने
Dipendra Singh 'Raaz'
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आए सही वो आए भले देर से यहाँ कितनी तो देर लगती है अजमेर से यहाँ
Dipendra Singh 'Raaz'
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याद आईं चाँद की देखा जो तुम को चाँद को देखा जो तो तुम याद आईं
Dipendra Singh 'Raaz'
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जिन को पनाह नहीं मिलती है बाँहों में रक़्स किया करते हैं वो सहराओं में
Dipendra Singh 'Raaz'
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होते हुए तुम्हारे भी तरसे हैं प्यार को सूखा रहा है शहर ये बारिश के बा'द भी
Dipendra Singh 'Raaz'
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