रिश्ते में बस्तगी लिख रहा हूँ फिर वही ज़िन्दगी लिख रहा हूँ उन हसीं रातों को दफ़्न कर के अब कहाँ दिल-लगी लिख रहा हूँ
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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ज़िन्दगी को यूँँ फिर आज़माने के बा'द कुछ भी तो अब नहीं है ज़माने के बा'द कैसे ख़ुद को भी दे अब तसल्ली यहाँ पे कैसे ग़म में है वो गुनगुनाने के बा'द
Naviii dar b dar
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ये अदावत भी तो इंसानों की दुश्मन है क्यूँँ न हम थोड़ा मुहब्बत से ही पेश आऍं
Naviii dar b dar
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पुख़्ता है अब आयाम भी उन के बहकाने के लिए शाम आवाज़ें दे रहे वो यूँँ मय-ख़ाने के लिए
Naviii dar b dar
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ज़माने भर से तो की दिल-लगी हम ने मोहब्बत का सलीक़ा भी नहीं आया
Naviii dar b dar
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वो मुझ को याद भी क्या करता होगा अब ये हर दिन जिस की यादों में गुज़रता है
Naviii dar b dar
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