पुख़्ता है अब आयाम भी उन के बहकाने के लिए शाम आवाज़ें दे रहे वो यूँँ मय-ख़ाने के लिए
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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ये मत भूलो कि ये लम्हात हम को बिछड़ने के लिए मिलवा रहे हैं
Jaun Elia
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हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं ख़ुद किसी और के भरोसे हैं ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
Vikram Gaur Vairagi
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हम भी गाँव में शाम को बैठा करते थे हम को भी हालात ने बाहर भेजा है
Zahid Bashir
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ज़िन्दगी को यूँँ फिर आज़माने के बा'द कुछ भी तो अब नहीं है ज़माने के बा'द कैसे ख़ुद को भी दे अब तसल्ली यहाँ पे कैसे ग़म में है वो गुनगुनाने के बा'द
Naviii dar b dar
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वो मेरा ही बना अपना भी जिस तरह यारों हवाओं को भी तो इस की ख़बर नहीं थी यूँँ
Naviii dar b dar
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यूँँ सपने भी मन में सजाए तो कैसे यहाँ मुफ़लिसी के सताए हैं हम भी
Naviii dar b dar
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ज़मीं पे आसमाँ पिघला हुआ ही पाओगे समय यूँँ हाथों से निकला हुआ ही पाओगे किसी के वास्ते ख़ुद को सँवार कर देखो तुम अपने आप को बदला हुआ ही पाओगे
Naviii dar b dar
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यूँँ देगा तवज्जोह कोई तो यहाँ पर कभी ये ज़माना भी समझेगा हम को
Naviii dar b dar
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