यूँँ देगा तवज्जोह कोई तो यहाँ पर कभी ये ज़माना भी समझेगा हम को
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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ज़मीं पे आसमाँ पिघला हुआ ही पाओगे समय यूँँ हाथों से निकला हुआ ही पाओगे किसी के वास्ते ख़ुद को सँवार कर देखो तुम अपने आप को बदला हुआ ही पाओगे
Naviii dar b dar
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उस के चेहरे से नज़र अब भला कैसे हटे उस में दिखती है झलक मुझ को मेरे यार की
Naviii dar b dar
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रिश्ते में बस्तगी लिख रहा हूँ फिर वही ज़िन्दगी लिख रहा हूँ उन हसीं रातों को दफ़्न कर के अब कहाँ दिल-लगी लिख रहा हूँ
Naviii dar b dar
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मुहब्बत ने सब को किनारा दिया है किसी शख़्स का यूँँ सहारा दिया है जिसे मानता है ये सारा ज़माना मुक़द्दस ये रिश्ता भी प्यारा दिया है
Naviii dar b dar
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वो अलग किरदार में दिखता है अब आदमी क्यूँ हार में दिखता है अब देख कर दुख होता है दिल को मेरे झूठ जब अख़बार में दिखता है अब
Naviii dar b dar
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