रूहों के पर्दा-पोश गुनाहों से बे-ख़बर जिस्मों की नेकियाँ ही गिनाता रहा हूँ मैं
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व्यूह के चक्र को तोड़कर आए हैं बे-ख़बर ज़िंदगी छोड़कर आए हैं जिस नदी ने कभी हम को सींचा नहीं उस नदी का सफ़र मोड़कर आए हैं
Puneet Mishra Akshat
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हमारे कुछ गुनाहों की सज़ा भी साथ चलती है हम अब तन्हा नहीं चलते दवा भी साथ चलती है
Munawwar Rana
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तुम जिस्मों का प्यार समझ बैठे हम को तो रूहों तक जाना था
Manish Yadav
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नहीं है चाह जिस्मों की न दौलत चाहिए तेरी मिले दिल में जगह तेरे वहीं दुनिया बसा लूँगा
Jitendra "jeet"
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जिस्मों की भूख हम को नहीं है पेड़ देखे हैं फल खाते तुम ने
Yuvraj Singh Faujdar
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रह-गुज़र-ए-ख़याल में दोश-ब-दोश थे जो लोग वक़्त की गर्द-बाद में जाने कहाँ बिखर गए
Jaun Elia
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जाते जाते आप इतना काम तो कीजे मिरा याद का सारा सर-ओ-सामाँ जलाते जाइए
Jaun Elia
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आप मुझ को बहुत पसंद आईं आप मेरी क़मीज़ सीजिएगा
Jaun Elia
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जमा हम ने किया है ग़म दिल में इस का अब सूद खाए जाएँगे
Jaun Elia
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ख़ूब है इश्क़ का ये पहलू भी मैं भी बर्बाद हो गया तू भी
Jaun Elia
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