व्यूह के चक्र को तोड़कर आए हैं बे-ख़बर ज़िंदगी छोड़कर आए हैं जिस नदी ने कभी हम को सींचा नहीं उस नदी का सफ़र मोड़कर आए हैं
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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जिस को समझा था रौशनी-ए-क़मर शख़्स ऐसा वो आबगीना था उस सेे बिछड़े थे सर्द मौसम में साल का पहला ही महीना था
Puneet Mishra Akshat
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नए बरस से मुहब्बत नहीं करेंगे हम किसी से इश्क़ में ये आख़िरी दिसंबर है
Puneet Mishra Akshat
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हर दिए को मुयस्सर नहीं रौशनी रात भर एक जुगनू जला रह गया मैं ने रस्में-निशानी में दिल दे दिया और वो था के बस बे-वफ़ा रह गया
Puneet Mishra Akshat
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यहाँ अब कौन करता है ज़माने में वफ़ा उल्फ़त यहाँ उल्फ़त के आड़े जिस्म के व्यापार होते हैं मुझे बीता हुआ अपना ज़माना याद आता है कहाँ फिर से वो बचपन के भला इतवार होते हैं
Puneet Mishra Akshat
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किसी की याद में इतना रहा हूँ मिरी आँखों के आँसू मर गए हैं
Puneet Mishra Akshat
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