रोष इतना बढ़ा बढ़ा सा है हर कोई फिर ख़फ़ा ख़फ़ा सा है
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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ये दिल तेरी ज़ुल्फ़ों से गिरफ़्तार हुआ है ख़ामोश लबों से ही तो इज़हार हुआ है
Manohar Shimpi
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उस्लूब से तहज़ीब-ए-कुहन बोल रहा है हर शख़्स से करने को जतन बोल रहा है
Manohar Shimpi
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उस ने झरोखे से फ़क़त देखा मगर वो चाँद सा चेहरा नज़र आया मुझे
Manohar Shimpi
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याद कोई तेरा सबब आया ध्यान में देर से ग़ज़ब आया
Manohar Shimpi
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वक़्त आता और जाता है "मनोहर" फिर ग़म-ए-दिल और शिकवा क्यूँँ रहे है
Manohar Shimpi
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