सारे जहाँ का नूर भी फीका लगे वो कान पर इक लट लगा ले काफ़ी है
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गुनाहगार को इतना पता तो होता है जहाँ कोई नहीं होता ख़ुदा तो होता है
Waseem Barelvi
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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम पगला गए हैं आप के चू में हुए दरख़्त
Varun Anand
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ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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तारीकियों को आग लगे और दिया जले ये रात बैन करती रहे और दिया जले उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब वो रौशनी की बात करे और दिया जले
Tehzeeb Hafi
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मैं तेरे बा'द कोई तेरे जैसा ढूँढ़ता हूँ जो बे-वफ़ाई करे और बे-वफ़ा न लगे
Abbas Tabish
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ज़िंदगी से सब को कुछ तो चाहिए तू मगर वो है जो सब को चाहिए साथ तेरे एक दिन ही काफ़ी है इतनी लंबी उम्र किस को चाहिए
Amit Rajvanshi 'Guru'
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वो बात और है जो मैं ग़मज़दा नहीं सब की तरह मेरा भी इक काश रह गया
Amit Rajvanshi 'Guru'
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वो और दिन थे जब कोई पूछता न था रहते हैं आज सब मेरे इंतिज़ार में
Amit Rajvanshi 'Guru'
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वैसे मेरा इरादा था ग़म भूल जाने का तुम रूबरू हुए तो इरादा बदल लिया
Amit Rajvanshi 'Guru'
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ये है तेरा दिया आख़िरी ज़ख़्म इस का बनता है नासूर होना
Amit Rajvanshi 'Guru'
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