सारी बात बता रक्खी है फिर दूरी भी बना रक्खी है साथ भी है और साथी भी नइँ कैसी क़िस्मत पा रक्खी है
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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ज़रा सी अपनी बात नहीं मिलने पे तुम यूँँ रूठे हो जैसे उलफ़त थी ही नहीं
Ambar
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उसे मुझ को अपना बनाने की ख़ातिर ज़मीं आसमाँ एक करना पड़ेगा
Ambar
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मुझे बस तुम्हारी ख़ुशी चाहिए तुम्हारी ख़ुशी चाहे जिस में भी हो
Ambar
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ये मत सोचो केवल मैं हूँ इस दुनिया में सब ही दुखी हैं
Ambar
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तोहफ़ा एक अनोखा पाया जीवन भर का धोखा पाया
Ambar
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