सारी हिम्मत टूट गई, बच्चों से ये सुन कर अब भूखे पेट गुज़ारा करने की हिम्मत है फूँका घर, भूखे बच्चे, टूटी उम्मीदें, अब मुझ में, रस्सी को फंदा करने की हिम्मत है
Related Sher
कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
112 likes
दास्ताँ हूँ मैं इक तवील मगर तू जो सुन ले तो मुख़्तसर भी हूँ
Tehzeeb Hafi
95 likes
तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
107 likes
दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है
Waseem Barelvi
113 likes
ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा
Munawwar Rana
77 likes
More from Aman G Mishra
ज़िन्दगी सब कारना में जानती है ज़िन्दगी से मुँह छिपा कर क्या करेंगे
Aman G Mishra
1 likes
ख़ुश-मिज़ाजी यही कि जी रहा हूँ और दुख भी कि इस जहान में हूँ
Aman G Mishra
2 likes
परिंदे नहीं हम मगर पर हमारे ज़मीं की हिफ़ाज़त करें आ समाँ से
Aman G Mishra
1 likes
शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें ज़रूरत बने आदमी आदमी की कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की ये सारी तपस्या का कारण यही है मिसालें बनें तो बनें सादगी की
Aman G Mishra
2 likes
गाँव तज कर; अब नहीं होते रुआँसे गाँव में इक घर बना कर क्या करेंगे
Aman G Mishra
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Aman G Mishra.
Similar Moods
More moods that pair well with Aman G Mishra's sher.







