ज़िन्दगी सब कारना में जानती है ज़िन्दगी से मुँह छिपा कर क्या करेंगे
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं
Rahat Indori
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शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें ज़रूरत बने आदमी आदमी की कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की ये सारी तपस्या का कारण यही है मिसालें बनें तो बनें सादगी की
Aman G Mishra
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परिंदे नहीं हम मगर पर हमारे ज़मीं की हिफ़ाज़त करें आ समाँ से
Aman G Mishra
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सारी हिम्मत टूट गई, बच्चों से ये सुन कर अब भूखे पेट गुज़ारा करने की हिम्मत है फूँका घर, भूखे बच्चे, टूटी उम्मीदें, अब मुझ में, रस्सी को फंदा करने की हिम्मत है
Aman G Mishra
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जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
Aman G Mishra
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ख़ुश-मिज़ाजी यही कि जी रहा हूँ और दुख भी कि इस जहान में हूँ
Aman G Mishra
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