परिंदे नहीं हम मगर पर हमारे ज़मीं की हिफ़ाज़त करें आ समाँ से
Related Sher
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
333 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
283 likes
More from Aman G Mishra
शबो रोज़ की चाकरी ज़िन्दगी की मुयस्सर हुईं रोटियाँ दो घड़ी की नहीं काम आएँ जो इक दिन मशीनें ज़रूरत बने आदमी आदमी की कि कल शाम फ़ुरसत में आई उदासी बता दी मुझे क़ीमतें हर ख़ुशी की किया क्या अमन जी ने बाइस बरस में कभी जी लिया तो कभी ख़ुद-कुशी की ग़मों को ठिकाने लगाते लगाते घड़ी आ गई आदमी के ग़मी की ये सारी तपस्या का कारण यही है मिसालें बनें तो बनें सादगी की
Aman G Mishra
2 likes
ज़िन्दगी सब कारना में जानती है ज़िन्दगी से मुँह छिपा कर क्या करेंगे
Aman G Mishra
1 likes
ख़ुश-मिज़ाजी यही कि जी रहा हूँ और दुख भी कि इस जहान में हूँ
Aman G Mishra
2 likes
जिन लोगों पर मैं विश्वास जताता हूँ उन लोगों से ही धोखा खा जाता हूँ मैं ने लोगों के चेहरे पढ़ रक्खे हैं फिर भी उन की बातों में आ जाता हूँ
Aman G Mishra
3 likes
गाँव तज कर; अब नहीं होते रुआँसे गाँव में इक घर बना कर क्या करेंगे
Aman G Mishra
3 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Aman G Mishra.
Similar Moods
More moods that pair well with Aman G Mishra's sher.







