सब दे रहे हैं दिल मुझे अपना निकाल के दरअस्ल मैं ने शे'र कहे हैं कमाल के अब आप सोच लीजिए मजबूरियाँ मेरी हिज्र-ओ-विसाल तय करूँँ सिक्का उछाल के
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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एक ग़लत-फ़हमी ने ज़िंदा रक्खा है शे'र मेरे वो चुपके चुपके पढ़ती है
Tanoj Dadhich
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बहुत हैरान हैं हम भी तुम्हारे बिन बना दिया किसी की मुस्कुराहट ने हमारा दिन बना दिया
Tanoj Dadhich
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ज़िन्दगी पर लिख दिया था नाम मैं ने राम का और फिर दुख के समुंदर पार सारे हो गए
Tanoj Dadhich
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दो दफ़ा ग़ुस्सा हुए वो एक ग़लती पर मेरी रात की रोटी सवेरे काम में लाई गई
Tanoj Dadhich
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जो साँसों को गिनते गिनते जीता है उस की मौत ज़रा जल्दी आ जाती है
Tanoj Dadhich
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