सब को हासिल होने में कुछ मजबूरी क़ाएम रख सब सेे रिश्ते रख लेकिन सब सेे दूरी क़ाएम रख
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हर एक चीज़ वहीं है जहाँ पे छोड़ी थी बस एक घर ही नहीं आ रहा नज़र घर में
Armaan khan
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यार सिगरेट जलाओ के बहुत दर्द है आज सर्द सी रात है बारिश है हवा चल रही है कोई पूछे कि ये सब क्या है तो कह देना उसे बच तो निकले हैं मोहब्बत से दवा चल रही है
Armaan khan
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यार कश्ती है बहुत दूर, किनारा है कोई डूबने वाले को तिनके का सहारा है कोई अजनबियत के मकड़जाल में उलझे हुए हम ख़ुदस ही पूछ रहे हैं कि तुम्हारा है कोई
Armaan khan
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ये फ़ासला ज़रूर है मगर ये फ़ैसला नहीं सो बेबसी में कह रहा हूँ मैं कोई गिला नहीं मैं देर रात कमरे में ये सोच कर के आया हूँ अब इस के बा'द और कोई रास्ता बचा नहीं
Armaan khan
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मैं इक ख़याल की दुनिया का शाहज़ादा हूँ मेरे ख़याल की क्यारी का फूल थी तुम भी मैं एक बार मोहब्बत में फिर शिकस्ता रहा सो बेबसी में ये कहता हूँ भूल थी तुम भी
Armaan khan
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