सदा हो आसरा बस आप का यूँँ कि साँसें बीत जाएँ बंदगी में
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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यूँँ तो रुस्वाई ज़हर है लेकिन इश्क़ में जान इसी से पड़ती है
Fahmi Badayuni
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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न गए आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
Farhat Abbas Shah
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दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए अभी उड़ते नहीं तो फ़ाख़्ता के साथ हैं बच्चे अकेला छोड़ देंगे माँ को जिस दिन पर निकल आए
Mehshar Afridi
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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उठी थी आग चिंगारी से देखो लगी थी शक कि बीमारी से देखो कि दानाई को तुम रक्खो परे अब निभा के तुम भी दिलदारी से देखो
Manish Pithaya
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ज़माने को ज़रूरत है मोहब्बत की मुरव्वत की मगर हम ने तो नफ़रत के सिवा दिल में रखा क्या है
Manish Pithaya
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ज़िंदगी तू बदल गई लेकिन हम से क्या हो सका मोहब्बत में
Manish Pithaya
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हूँ मुश्त-ए-ख़ाक तू उपकार कर दे हक़ीक़त का मुझे हक़दार कर दे शिकायत-गर भी करते हैं तशक्कुर तू जिस की ज़िंदगी हमवार कर दे
Manish Pithaya
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तर्जनी पर गिन सज़ा के दिन मेरे तू इक मुझी पर जुर्म का दावा चला है
Manish Pithaya
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