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सदाक़त छुपाने कि ज़िद पर अड़े थे ये वो लोग थे जो कि सब में बड़े थे

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ज़ुल्म के क़िस्से सुनाए जब कभी तफ़्सीर से ख़ून धीरे से उतर आया मिरी तस्वीर से मैं ज़मीं से यूँँ लिपट कर रो नहीं सकता फ़क़त आसमाँ ने बाँध रक्खा है मुझे ज़ंजीर से

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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शहर तो ख़ाली पड़ा है यार अब तू ही बता आज किस का ध्यान खींचूँ बंद कमरों की तरफ़

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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ये कि मेरा आसमाँ जो आ गया नज़र तुम्हें बारिशें सिखा रही हैं इक नया हुनर तुम्हें

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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फिर रोज़ की तरह का वही ग़म समेटना ऊपर से इस शराब से उक्ता गया था मैं

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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रहें जो भीड़ में भी दूर से पहचान जाती है बिना बोले सुने बातें सभी की जान जाती है ग़नीमत है कि रुतबे से गुमाँ नासाज़ है इस के तभी तो बात ये लड़की हमारी मान जाती है

Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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