सपनों पे जिस के पड़ गई भारी कमी इक इंच की बस वो ही लड़का जानता निर्णीत पैमानों का दुख
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ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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महीनों फूल भिजवाने पड़े थे वो पहली बार जब रूठा था मुझ से
Varun Anand
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ये मानो न मानो यहाँ अपना कल सुन रहा है ये पढ़ने की इस उम्र में जो ग़ज़ल सुन रहा है
Sandeep dabral 'sendy'
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याद यहाँ सिरहाने मेरे आ कर बैठा करती है ग़ुस्से में वो तनकर भौंहें रोब जमाया करती है
Sandeep dabral 'sendy'
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उस का बोसा पाकर झुमके याँ हर-दम क्यूँ इठलाते हैं बोसा पाकर सोचा हम ने इतना कम क्यूँ इठलाते हैं
Sandeep dabral 'sendy'
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ये क़ल्ब कहाँ रह पाता है तब काबू में जब बैठा करती है वो मेरे बाज़ू में
Sandeep dabral 'sendy'
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वो कहते थे गर बिछड़े तो मर जाएँगे हम पर कल हम ने उन को हँसते गाते हुए देखा
Sandeep dabral 'sendy'
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