साथ दिया है किस ने किस का किस की सोहबत कौन चलेगा मेरी ज़िल्लत मेरी ख़िफ़्फ़त ले कर तोहमत कौन चलेगा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ज़िक्र होता है तिरा जब भी धड़कता दिल बहुत है भूलना तुझ को सितमगर आज भी मुश्किल बहुत है
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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छोड़कर तीर-ए-नज़र जान-ए-जिगर देखो नहीं देखते हो जिस क़दर तुम उस क़दर देखो नहीं
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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हस्ब-ए-दस्तूर दिल को सता तो सही तू अदावत ही रख पर निभा तो सही मुझ को देखे पे ज़ुल्फ़ें सँवारे है क्यूँँ इश्क़ के क़ायदों को हटा तो सही
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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इशारों ही में हाल-ए-दिल मैं सारा खोल जाता हूँ बहुत ख़ामोश रह कर भी बहुत कुछ बोल जाता हूँ
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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शाम को दीदार अपना आइने में हो गया फ़ाश सब किरदार अपना आइने में हो गया बरगुज़ीदा एक सूरत क़ैद आँखों में हुई और बस घर-बार अपना आइने में हो गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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