इशारों ही में हाल-ए-दिल मैं सारा खोल जाता हूँ बहुत ख़ामोश रह कर भी बहुत कुछ बोल जाता हूँ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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ज़िक्र होता है तिरा जब भी धड़कता दिल बहुत है भूलना तुझ को सितमगर आज भी मुश्किल बहुत है
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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साथ दिया है किस ने किस का किस की सोहबत कौन चलेगा मेरी ज़िल्लत मेरी ख़िफ़्फ़त ले कर तोहमत कौन चलेगा
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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शाम को दीदार अपना आइने में हो गया फ़ाश सब किरदार अपना आइने में हो गया बरगुज़ीदा एक सूरत क़ैद आँखों में हुई और बस घर-बार अपना आइने में हो गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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इश्क़ के बीमार का वाजिब मुक़द्दर मय-कदा राह मुश्किल है न हो हर मील पर गर मय-कदा आदमी होते ‘तहम्मुल’ रोज़ जाते काम पर गर गली ये छोड़ देते है जहाँ पर मय-कदा
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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इश्क़ को ढोता हुआ इक ख़र गया मुझ में अक़्ल कुछ बाक़ी थी आके चर गया मुझ में फ़लसफ़ी अंदाज़ ये है आप की नेमत शा'इरी करता था जो कल मर गया मुझ में
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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