sherKuch Alfaaz

इश्क़ के बीमार का वाजिब मुक़द्दर मय-कदा राह मुश्किल है न हो हर मील पर गर मय-कदा आदमी होते ‘तहम्मुल’ रोज़ जाते काम पर गर गली ये छोड़ देते है जहाँ पर मय-कदा

More from Dhiraj Singh 'Tahammul'

साथ दिया है किस ने किस का किस की सोहबत कौन चलेगा मेरी ज़िल्लत मेरी ख़िफ़्फ़त ले कर तोहमत कौन चलेगा

Dhiraj Singh 'Tahammul'

0 likes

ज़िक्र होता है तिरा जब भी धड़कता दिल बहुत है भूलना तुझ को सितमगर आज भी मुश्किल बहुत है

Dhiraj Singh 'Tahammul'

0 likes

छोड़कर तीर-ए-नज़र जान-ए-जिगर देखो नहीं देखते हो जिस क़दर तुम उस क़दर देखो नहीं

Dhiraj Singh 'Tahammul'

0 likes

शाम को दीदार अपना आइने में हो गया फ़ाश सब किरदार अपना आइने में हो गया बरगुज़ीदा एक सूरत क़ैद आँखों में हुई और बस घर-बार अपना आइने में हो गया

Dhiraj Singh 'Tahammul'

0 likes

जिस तरफ़ भी हाथ डाला ग़म निकल आए हो रफ़ू कैसे बदन की दम निकल आए खा रहा था अक्स तेरा जो रहा मुझ में थे नहीं महफूज़ ख़ुद में हम निकल आए

Dhiraj Singh 'Tahammul'

0 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Dhiraj Singh 'Tahammul'.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Dhiraj Singh 'Tahammul''s sher.