साया पड़े न तुझ पे किसी बदनसीब का या'नी के मेरा साथ मुयस्सर न हो तुझे
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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तुम तो बेताब थे जगाने को पर मुझे नींद ही नहीं आई
Upendra Bajpai
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सोलह दिन पहले तक जो बस मेरी थी सोलह दिन के बा'द वही 'तौबा-तौबा'
Upendra Bajpai
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वो अपने साथ साथ में हम जैसे खिलौने रखती है डेढ़ साल से ज़्यादा नहीं रखती
Upendra Bajpai
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लौट आता हूँ अधूरा ही उसे मिल कर मैं वस्ल के दिन भी मुकम्मल नहीं मिलता मुझ को
Upendra Bajpai
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मैं आँखें बंद कर के देखता हूँ मैं जब मर जाऊँगा कैसा लगूँगा
Upendra Bajpai
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