शराबों से ख़ुमारी आ रही है नशा तेरा उतरता जा रहा है
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कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी यूँँ कोई बे-वफ़ा नहीं होता
Bashir Badr
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ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो
Shakeel Azmi
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तेरी ख़ता नहीं जो तू ग़ुस्से में आ गया पैसे का ज़ो'म था तेरे लहजे में आ गया सिक्का उछालकर के तेरे पास क्या बचा तेरा ग़ुरूर तो मेरे काँसे में आ गया
Mehshar Afridi
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तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है तेरे आगे चाँद पुराना लगता है
Kaif Bhopali
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रख के हर चीज़ भूलने वाली ला तेरा दिल सँभाल कर रख दूँ
Kumar Vishwas
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वही मंज़र मुझे हर बार नज़र आता है आँख मूँदूँ तो मुझे यार नज़र आता है ऐसे तो मौत का मेरी कोई क़ातिल ही नहीं वैसे हर शख़्स गुनहगार नज़र आता है
anupam shah
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तुम्हें मैं बस तुम्हारी सम्त रख कर लौट आऊँगा मुझे मालूम है जो दर्द है रस्ता भटकने का
anupam shah
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तस्वीर ऐसी आई है कुछ अस्ल में तेरी उलझन भी है राहत भी है कुछ वस्ल में तेरी तू गर डरेगा आज तो तेरा भला होगा पर जान ले जो डर उठेगा नस्ल में तेरी
anupam shah
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हँसना-वसना धीरे धीरे कम होगा धीरे धीरे दिख जाएँगे सब चेहरे
anupam shah
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तुम्हें तो यूँँ ही किस्मत से मोहब्बत मिल गई थी ना अगर मेहनत से मिलती तो जुदा होने का ग़म होता
anupam shah
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