शौक़ है इस दिल-ए-दरिंदा को आप के होंठ काट खाने का
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अपने में'यार से नीचे तो मैं आने से रहा शे'र भूखा हूँ मगर घास तो खाने से रहा
Mehshar Afridi
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घर की तक़्सीम में अँगनाई गँवा बैठे हैं फूल गुलशन से शनासाई गँवा बैठे हैं बात आँखों से समझ लेने का दावा मत कर हम इसी शौक़ में बीनाई गँवा बैठे हैं
Abrar Kashif
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लोग हम सेे सीखते हैं ग़म छुपाने का हुनर आओ तुम को भी सिखा दें मुस्कुराने का हुनर क्या ग़ज़ब है तजरबे की भेंट तुम ही चढ़ गए तुम से ही सीखा था हम ने दिल दुखाने का हुनर
Kashif Sayyed
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कोई तो पूछे मोहब्बत के इन फ़रिश्तों से वफ़ा का शौक़ ये बिस्तर पे क्यूँ उतर आया
Harsh saxena
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ज़िन्दगी से ऐसे काटा सीन उस ने इश्क़ का देखता है कोई जैसे फ़िल्म गाने काट कर
Ankit Maurya
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रह-गुज़र-ए-ख़याल में दोश-ब-दोश थे जो लोग वक़्त की गर्द-बाद में जाने कहाँ बिखर गए
Jaun Elia
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ख़ूब है इश्क़ का ये पहलू भी मैं भी बर्बाद हो गया तू भी
Jaun Elia
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मुस्कुराए हम उस से मिलते वक़्त रो न पड़ते अगर ख़ुशी होती
Jaun Elia
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जो रा'नाई निगाहों के लिए सामान-ए-जल्वा है लिबास-ए-मुफ़्लिसी में कितनी बे-क़ीमत नज़र आती यहाँ तो जाज़बिय्यत भी है दौलत ही की पर्वर्दा ये लड़की फ़ाक़ा-कश होती तो बद-सूरत नज़र आती
Jaun Elia
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आप मुझ को बहुत पसंद आईं आप मेरी क़मीज़ सीजिएगा
Jaun Elia
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