सितंबर डेट थी सोलह गई थी छोड़कर जब वो यही तारीख़ है वो जो हमेशा याद रहती है
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
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वो मेरा जब न हो सका तो फिर यही सज़ा रहे किसी को प्यार जब करूँँ वो छुप के देखता रहे
Mazhar Imam
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छोड़ो दुनिया की परवाहें, करो मोहब्बत मुश्किल हों कितनी भी राहें, करो मोहब्बत सुन कर देखो सारे मंदिर यही कहेंगे यही कहेंगी सब दरगाहें, करो मोहब्बत
Bhaskar Shukla
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वो आग बुझी तो हमें मौसम ने झिंझोड़ा वर्ना यही लगता था कि सर्दी नहीं आई
Khurram Afaq
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साज़ ख़ामोश कि इक टूटते संगीत के नाम प्यार में हम ने किए गीत समर्पन कितने तौबा ये तमकनत-ए-हुस्न इलाही तौबा एक श्रृंगार को तोड़े गए दर्पन कितने
Shashank Shekhar Pathak
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हवा मेरे अपनों ने दी थी नहीं तो जलाया किसी ने मिरा घर न होता
Shashank Shekhar Pathak
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फ़क़त इक तिरी याद आती रही है तू आया नहीं फिर शहर जाने के बा'द तू इक मर्तबा बस मिरा नाम लेना कभी याद आऊँ जो मर जाने के बा'द
Shashank Shekhar Pathak
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तुम्हें नाज़ है हुस्न पर तो सुनो तुम मुझे भी जुदाई का अब डर न होता
Shashank Shekhar Pathak
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था इक शख़्स वो जो कि क़ातिल था मेरा मिरे दर्द-ए-दिल की शिफ़ा जानता था
Shashank Shekhar Pathak
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