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सितंबर डेट थी सोलह गई थी छोड़कर जब वो यही तारीख़ है वो जो हमेशा याद रहती है

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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है

Tehzeeb Hafi

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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए

Tehzeeb Hafi

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वो मेरा जब न हो सका तो फिर यही सज़ा रहे किसी को प्यार जब करूँँ वो छुप के देखता रहे

Mazhar Imam

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छोड़ो दुनिया की परवाहें, करो मोहब्बत मुश्किल हों कितनी भी राहें, करो मोहब्बत सुन कर देखो सारे मंदिर यही कहेंगे यही कहेंगी सब दरगाहें, करो मोहब्बत

Bhaskar Shukla

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वो आग बुझी तो हमें मौसम ने झिंझोड़ा वर्ना यही लगता था कि सर्दी नहीं आई

Khurram Afaq

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