वो आग बुझी तो हमें मौसम ने झिंझोड़ा वर्ना यही लगता था कि सर्दी नहीं आई
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
Mirza Ghalib
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं
Abrar Kashif
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नताएज जब सर-ए-महशर मिलेंगे मोहब्बत के अलग नंबर मिलेंगे तुम्हारी मेज़बानी के बहाने कोई दिन हम भी अपने घर मिलेंगे
Khurram Afaq
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बुरा बनता हूँ कि शायद ऐसे वो मिरे सामने अच्छा बन जाए
Khurram Afaq
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जो ज़रा ठीक से किरदार निगारी हो जाए ये कहानी तो हक़ीक़त पे भी तारी हो जाए तेरे हामी है सो उठ कर भी नहीं जा सकते जाने किस वक़्त यहाँ राय-शुमारी हो जाए
Khurram Afaq
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दवा से हल न हुआ तो दुआ पे छोड़ दिया तिरा मोआ'मला हम ने ख़ुदा पे छोड़ दिया
Khurram Afaq
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ख़ुद बुलाओ कि वो यूँँ घर से नहीं निकलेगा यहाँ इनआ'म मुक़द्दर से नहीं निकलेगा ऐसे मौसम में बिना काम के आया हुआ शख़्स इतनी जल्दी तेरे दफ़्तर से नहीं निकलेगा
Khurram Afaq
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