सुब्ह तक हिज्र में क्या जानिए क्या होता है शाम ही से मिरे क़ाबू में नहीं दिल मेरा
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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कूचा-ए-इश्क़ में निकल आया जिस को ख़ाना-ख़राब होना था
Jigar Moradabadi
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यही है ज़िंदगी तो ज़िंदगी से ख़ुद-कुशी अच्छी कि इंसाँ आलम-ए-इंसानियत पर बार हो जाए
Jigar Moradabadi
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या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है
Jigar Moradabadi
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हमीं जब न होंगे तो क्या रंग-ए-महफ़िल किसे देख कर आप शरमाइएगा
Jigar Moradabadi
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जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं वही दुनिया बदलते जा रहे हैं
Jigar Moradabadi
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