सुनी सुनाई सी वो पुरानी मोहब्बतों का मिज़ाज बदलो न हाथ पकड़ो न होंठ चूमो मोहब्बतों का रिवाज़ बदलो
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हर एक शख़्स चलेगा हमारी राहों पर मोहब्बतों में हमें वो मिसाल होना है
Wasi Shah
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सुनो कि अब हम गुलाब देंगे गुलाब लेंगे मोहब्बतों में कोई ख़सारा नहीं चलेगा
Jawayd Anwar
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आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई
Iqbal Ashhar
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मोहब्बतों में बहुत रस भी है मिठास भी है हमारे जीने की बस इक यही असास भी है
Akhtar Amaan
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नहीं मैं रह नहीं सकता यहीं मैं कह नहीं सकता किनारा है तभी हूँ मैं नहीं तो बह नहीं सकता पुरानी एक इमारत हूँ कि क्या देखा नहीं मैं ने किसी के छोड़ जाने से तो मैं यूँँ ढह नहीं सकता
Praveen Bhardwaj
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उस के झुमके की बात क्या कीजे उस की बातें भी यार गहना हैं
Gaurav Singh
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वो जिस तरह से नाम मेरा लेती है मुझे लगता है मेरे होने से दुनिया जहान है
Gaurav Singh
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तेरी वज़ह से मैं नीम-जाँ सा न जी सकूँ हूँ न मर सकूँ हूँ
Gaurav Singh
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तुम्हारी याद के गहरे भँवर में तख़य्युल रक़्स करना चाहता है
Gaurav Singh
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फिर वही रात वही सर्द हवा शोख़ बदन फिर वही उस का मेरे होंठ पे बोसा रखना
Gaurav Singh
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