ताज को कब तक निहारूँ बैठ तन्हा या'नी मुझ को भी बनाओ संगमरमर
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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सुहागन भी बता देगी मगर तुम पूछो विधवा से ये मंगलसूत्र ज़ेवर के अलावा भी बहुत कुछ है ये क्या इक मक़बरे को आख़री हद मान बैठे हो मोहब्बत संग-ए-मरमर के अलावा भी बहुत कुछ है
Zubair Ali Tabish
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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उछालेंगे सभी क़िस्से मिरे तौहीन भी होगी अगर तुम को यक़ीं है तो ज़माने से नहीं डरना
Ganesh gorakhpuri
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होंठ है ख़ामोश फिर भी बोलती हैं ये निगाहें आज के इस दौर में भी सादगी क्या ख़ूब लगती
Ganesh gorakhpuri
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हटाया जा चुका था हुस्न से पर्दा किसी के लिए निगाहें फेर ली जाती किसी के अब गुजरने से
Ganesh gorakhpuri
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ज़िन्दगी के मंच पर किरदार पूरा हो गया है ये सभी ताली बजाएँगे यक़ीं है अब हमें भी
Ganesh gorakhpuri
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कह न पाया मैं किसी से इश्क़ की वो दास्ताँ इस तरह बेरोज़गारी में गुज़ारी ज़िंदगी
Ganesh gorakhpuri
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