तब्दील हुआ गाँव मिरा शहर में जब से बच्चा भी दरख़्तों से जुदा रहने लगा है
Related Sher
किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
162 likes
पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा कितना आसान था इलाज मिरा
Fahmi Badayuni
150 likes
हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
157 likes
क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
156 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
More from salman khan "samar"
ज़िंदगी मुझ को तिरी अब तो ज़रूरत ही नहीं उस की तस्वीर ही जीने के लिए काफ़ी है
salman khan "samar"
0 likes
वो पेड़ यूँँ पत्तों से जुदा रहने लगा है जैसे कोई अपनों से जुदा रहने लगा है पैसों की कमी आए न बच्चों पे कभी भी वो बाप तो बच्चों से जुदा रहने लगा है
salman khan "samar"
0 likes
उफ़ आदतन ही छोड़ के जाता हुआ ये दिन कुछ उम्र मेरी और घटा कर चला गया
salman khan "samar"
0 likes
वो हाथ पकड़ कर के 'समर' खींचना उस का इक शख़्स के हाथों में तिरी याद है सीकर
salman khan "samar"
0 likes
तिरे दर से यूँँ उठ कर मैं न जाऊँगा किसी और दर तिरे ही दर पे मरने की क़सम खाई है मैं ने तो
salman khan "samar"
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on salman khan "samar".
Similar Moods
More moods that pair well with salman khan "samar"'s sher.







