उफ़ आदतन ही छोड़ के जाता हुआ ये दिन कुछ उम्र मेरी और घटा कर चला गया
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
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ज़िंदगी मुझ को तिरी अब तो ज़रूरत ही नहीं उस की तस्वीर ही जीने के लिए काफ़ी है
salman khan "samar"
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ये पता चलता आज़माने पर कौन रोता है दूर जाने पर मैं अलग हूँ ज़रा ज़माने से मुस्कुराता हूँ मैं सताने पर
salman khan "samar"
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उम्र भर उस की ही यादों में गुमाने के लिए कुछ मुलाक़ात अभी रब ने बचा रक्खी है
salman khan "samar"
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वो हाथ पकड़ कर के 'समर' खींचना उस का इक शख़्स के हाथों में तिरी याद है सीकर
salman khan "samar"
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शादी में गुलाबी सी जो कुर्ती वो पहन ले दुनिया की निगाहें तो अटक जाए उसी पे
salman khan "samar"
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