tahni pe khamosh ek parinda mazi ke ulat raha hai daftar
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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और बढ़ जाती है कुछ लफ़्ज़-ओ-बयाँ की तासीर लफ़्ज़ जब अश्क की सूरत में अदा होता है
Rais Amrohvi
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किस ने देखे हैं तिरी रूह के रिसते हुए ज़ख़्म कौन उतरा है तिरे क़ल्ब की गहराई में
Rais Amrohvi
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हम अपने हाल-ए-परेशाँ पे बारहा रोए और उस के बा'द हँसी हम को बारहा आई
Rais Amrohvi
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ख़ामोश ज़िन्दगी जो बसर कर रहे हैं हम गहरे समुंदरों में सफ़र कर रहे हैं हम
Rais Amrohvi
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टहनी पे ख़मोश इक परिंदा माज़ी के उलट रहा है दफ़्तर
Rais Amrohvi
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