तकल्लुफ़ कर रहे हम ख़ुद से ही जब भला लोगों की ज़ाहिर-दारी से क्या
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं ख़ुद किसी और के भरोसे हैं ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
Vikram Gaur Vairagi
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प्रेम ने थामा है जब से ज़िंदगी खिल सी गई है शब्द भी सब मौन तब से ध्यान भी ख़ुद घट रहा है
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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नज़र के सामने है खोजती जिस को नज़र तेरी ज़रा ख़ुद को जगाओ और बोलो देखने को सच
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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ज़ख़्म नासूर है और दवा भी वही हर्फ़ ढाई मगर ज़िंदगी है मेरी
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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पोंछता है कौन ही आँसू किसी के ज़िंदगी कहती है समझो मुस्कुराओ
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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जगमगाती रौशनी के पीछे भी है इक अँधेरा बोलो ना ये देख चेहरा ज़िंदगी देखी नहीं है
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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