ज़ख़्म नासूर है और दवा भी वही हर्फ़ ढाई मगर ज़िंदगी है मेरी
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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ख़मोशी तो यही बतला रही है उदासी रास मुझ को आ रही है मुझे जिन ग़लतियों से सीखना था वही फिर ज़िंदगी दोहरा रही है
Vishal Singh Tabish
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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न गए आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
Farhat Abbas Shah
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तीनों ज़िद्दी हैं कि हम तुझ सेे कहेंगे भी नहीं तू छूएगा भी नहीं ज़ख़्म भरेंगे भी नहीं
Shadab Javed
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ज़िंदगी जी नहीं जाती ऐसे मौत इक रोज़ बोली गले लग
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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नहीं की दोस्ती मैं ने किसी गुल से सितारों से कि हिस्से जो मिरे आए सभी वो दोस्त मुझ में थे
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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न आए सामने उस के कभी भी आईना कोई कि धड़कन में बसा जो है रहे आबाद दिल उस का
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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प्रेम ने थामा है जब से ज़िंदगी खिल सी गई है शब्द भी सब मौन तब से ध्यान भी ख़ुद घट रहा है
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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देवता कोई नहीं पर दिल बनाया प्रेम मंदिर बैठ मंदिर में अकेले ख़ुद को पूजे जा रहे हैं
Nainsee Gupta 'Nayantara'
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