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ज़ख़्म नासूर है और दवा भी वही हर्फ़ ढाई मगर ज़िंदगी है मेरी

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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए

Jaun Elia

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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है

Rahat Indori

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ख़मोशी तो यही बतला रही है उदासी रास मुझ को आ रही है मुझे जिन ग़लतियों से सीखना था वही फिर ज़िंदगी दोहरा रही है

Vishal Singh Tabish

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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न ग‌ए आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए

Farhat Abbas Shah

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तीनों ज़िद्दी हैं कि हम तुझ सेे कहेंगे भी नहीं तू छूएगा भी नहीं ज़ख़्म भरेंगे भी नहीं

Shadab Javed

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