sherKuch Alfaaz

तलाशा जब कभी तुझ को मेरे दिल में कहीं पाया शबों में और शामों में तुझे हर पल वहीं पाया मुझे डर था कहीं कोई न उस को छीन ले मुझ सेे मगर वो आसमाँ थी कोई उस को छू नहीं पाया

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