मातम फ़रेब ज़ख़्म ग़म-ओ-रंज औ ज़हर ज़ालिम बता ये आशिक़ी ने और क्या दिया
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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ये बात अभी सब को समझ आई नहीं है दीवाना है दीवाना तमन्नाई नहीं है दिल मेरा दुखाकर ये मुझे तेरा मनाना मरहम है फ़क़त ज़ख़्म की भरपाई नहीं है
Vikram Gaur Vairagi
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पर्वतों को ज़ख़्म गहरे दे दिए हैं पानियों से पत्थरों पर वार कर के
nakul kumar
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उस के लबों को चूम के ये इल्म हो गया मुझ को वो ज़हर के बिना भी मार सकती है
Harsh saxena
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यूँँ तो रुस्वाई ज़हर है लेकिन इश्क़ में जान इसी से पड़ती है
Fahmi Badayuni
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जब लगे मुश्किल है यूँँ ही मुस्कुराना लौट आना जब लगे दुनिया है कोई क़ैद-ख़ाना लौट आना
AYUSH SONI
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मेरे अहबाब कहते हैं वो तुम को याद करती है उन्हे कैसे बताऊँ अब मुझे हिचकी नहीं आती
AYUSH SONI
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फ़क़त जुगनू हूँ मैं, वो चाँदनी है उसी से इस जहाँ में रौशनी है
AYUSH SONI
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मैं उस को बेच आया हूँ किसी अफ़सर के हाथों में जिसे मैं बोल आया था तुम्हें दुल्हन बनाऊँगा
AYUSH SONI
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बसा जो शख़्स आँखों में है ओझल क्यूँँ नहीं होता ये पहला इश्क़ ही अक्सर मुकम्मल क्यूँँ नहीं होता यहाँ शहरों में ऐवानों के साए ही मुयस्सर हैं यहाँ गाँवों के जैसा कोई पीपल क्यूँँ नहीं होता
AYUSH SONI
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