तन्हा कमरे में सदा बैठ के रोने का मज़ा हम ग़रीबों के सिवा कौन समझ सकता है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तसव्वुर था उसे ख़ुद की मुकम्मल सी ग़ज़ल कहता नदामत है कि वो दुल्हन किसी की बन चुकी होगी
Rovej sheikh
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लगा के ज़ख़्म पर जानाँ नमक हँसकर ग़ज़ल कहना बहुत होता है मुुश्किल फिर सनम तुझ पर ग़ज़ल कहना सजी होती है इक महफ़िल पुराने यार होते हैं वही पीना पिलाना और ज़ियादा-तर ग़ज़ल कहना
Rovej sheikh
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माथे से उस की आँख तक पहुँचा ही था घबरा के उस ने कह दिया अब यार बस
Rovej sheikh
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ख़ुद से मैं ने यूँँ तो सब को निकाल फेंका पर एक शख़्स तो अब भी उस की जैसी है मुझ में
Rovej sheikh
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कर चुके जंगल से हिजरत सब परिंदे तेरी यादों से मैं हिजरत कर रहा हूँ
Rovej sheikh
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