ख़ुद से मैं ने यूँँ तो सब को निकाल फेंका पर एक शख़्स तो अब भी उस की जैसी है मुझ में
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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माथे से उस की आँख तक पहुँचा ही था घबरा के उस ने कह दिया अब यार बस
Rovej sheikh
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तसव्वुर था उसे ख़ुद की मुकम्मल सी ग़ज़ल कहता नदामत है कि वो दुल्हन किसी की बन चुकी होगी
Rovej sheikh
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तुम को हम से उलझन कौन हो तुम इश्क़ के जानी दुश्मन कौन हो तुम जिस को दिया था कंगन तुम वो नहीं लौटा रही हो कंगन कौन हो तुम
Rovej sheikh
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लगा के ज़ख़्म पर जानाँ नमक हँसकर ग़ज़ल कहना बहुत होता है मुुश्किल फिर सनम तुझ पर ग़ज़ल कहना सजी होती है इक महफ़िल पुराने यार होते हैं वही पीना पिलाना और ज़ियादा-तर ग़ज़ल कहना
Rovej sheikh
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जहाँ पर था बसा मेरा मकाँ तन्हा मैं बेहतर से भी बेहतर था वहाँ तन्हा
Rovej sheikh
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