तुम को हम से उलझन कौन हो तुम इश्क़ के जानी दुश्मन कौन हो तुम जिस को दिया था कंगन तुम वो नहीं लौटा रही हो कंगन कौन हो तुम
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुद से मैं ने यूँँ तो सब को निकाल फेंका पर एक शख़्स तो अब भी उस की जैसी है मुझ में
Rovej sheikh
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तसव्वुर था उसे ख़ुद की मुकम्मल सी ग़ज़ल कहता नदामत है कि वो दुल्हन किसी की बन चुकी होगी
Rovej sheikh
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कर चुके जंगल से हिजरत सब परिंदे तेरी यादों से मैं हिजरत कर रहा हूँ
Rovej sheikh
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जो लिखा दीवारों पे था नाम तेरा मिट रहा है तू भी या'नी मेरे दिल से रफ़्ता-रफ़्ता मिट रहा है रेत पे लिक्खा हुआ वो नाम मिट जाता है जैसे वैसे ही तो मेरे दिल से तेरा चेहरा मिट रहा है
Rovej sheikh
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इस में तेरी ख़ता नहीं है शहज़ादी तेरे बस की वफ़ा नहीं है शहज़ादी
Rovej sheikh
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