तीसरे दिन हमें मिली ये ख़बर ज़िंदगी चार दिन की होती है
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हाल मीठे फलों का मत पूछो रात दिन चाकूओं में रहते हैं
Fahmi Badayuni
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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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सच बताओ कि सच यही है क्या साँस लेना ही ज़िंदगी है क्या कुछ नया काम कर नई लड़की इश्क़ करना है बावली है क्या
Vikram Gaur Vairagi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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इस जहाँ के लिए आँखों में कशिश है ही नहीं मैं किसी और ही मंज़िल का मुसाफ़िर निकला
रूपम कुमार 'मीत'
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कैसे महदूद हो दो मिसरों में एक मुफ़लिस की ज़िंदगी का दुख
रूपम कुमार 'मीत'
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दिल टूटने का ग़म भी न महसूस कर सके बेहिस बना दिया है ज़माने ने यूँँ हमें
रूपम कुमार 'मीत'
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ता-क़यामत अमर नहीं होता मैं सुख़नवर अगर नहीं होता
रूपम कुमार 'मीत'
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आज तुलसी में पानी दे कर वो चल पड़ा पेड़ काटने के लिए
रूपम कुमार 'मीत'
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