तिरे जाने का मिरा गैज़ कम नहीं हो रहा कि गुनाह कर के भी कोई ग़म नहीं हो रहा
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा कितना आसान था इलाज मिरा
Fahmi Badayuni
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तुरफ़ा-ओ-चेहरा-ए-तरब थी तुम जीने का इक फ़क़त सबब थी तुम था मुलाज़िम ख़ुदा का इस ख़ातिर दिल-ए-मज़दूर की कसब थी तुम
Faiz Ahmad
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तुम्हारे ग़म को मगर ओढ़े रक्खा तीनों दिन मैं चाहता तो मना सकता था तेरे बिन ईद
Faiz Ahmad
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उस के पैग़ाम ने उम्मीद को भी तोड़ दिया उस का कहना है मुझे पाने की कोशिश न करे
Faiz Ahmad
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तुम जो आती हो जब भी पास मिरे क्यूँँ उतर जाते हैं लिबास मिरे
Faiz Ahmad
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मेरी सब दुआएँ राएगाँ रहेंगी तुम नहीं मिलोगी तुम नहीं मिलोगी
Faiz Ahmad
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